धीरे धीरे कुछ नही ...

धीरे धीरे कुछ नही

यहाँ अचानक जाग

या तो मन में चेतना

या तो नींद खराब

----------

शब्दों को नही अर्थ कछु

जो जोड़ा वह अर्थ

शब्द, भाव संकेतमय

ध्वनि केवल, सब व्यर्थ

----------

एक सकल को बूझता

मुख से कहता राम

दुजा बैठ मंदिर जपे

राम राम श्रीराम

......................................... अरुण

Comments

Popular posts from this blog

तीन पोस्टस्

पाँच विचार

लहरें समन्दर की, लहरें मन की