रुबाई

रुबाई
*******
ग़रीबी एक विपदा है कि हो बाहर या भीतर
खरी वो संपदा जो जनम ले बाहर और भीतर
रहें आइन्स्टाइन बुद्धी में ह्रदय को बुद्ध भाएँ
तभी विज्ञान और आध्यात्म का घटता स्वयंवर
- अरुण

Comments

Popular posts from this blog

तीन पोस्टस्

पाँच विचार

लहरें समन्दर की, लहरें मन की