Posts

अंतर्ज्ञान

ज्ञान से दृष्टिकोण बदलते हैं, अंतर्ज्ञान से बदलती है दृष्टि और फलतः सृष्टि भी -अरुण  

वक्त

वक्त बनाये इंसाकी मुराद खुद बना,बिगडा,हुआ बर्बाद ये वक्त जो है इंसा का दुश्मन की इंसा ने ही इसकी इजाद -अरुण

अपनी ही आँखों से दिखता

फलसफों की आँखसे कुछ भी न दिखना ज्ञान की दीवार के उसपार उठना बुद्ध,शंकर या कि ओशो कोई भी हों अपनी आँखों से ही अपना रूप चखना -अरुण      

खुद को अलग रखकर कुछ देखता नही

जो तथ्य देख लेता चुप बैठता नही – (यानी वैज्ञानिक) जो देखता रहे कुछ सोचता नही – (जीवंत आध्यात्मिक, दार्शनिक नही ) विज्ञान बडबडाता, अध्यात्म चुप रहे जो खुद को अलग रखकर कुछ देखता नही -अरुण  

खोज सच की

खोजने से नही हासिल ,ये ऐसा सच अच्छा यही कि तू खोजने से ही बच ये देख, क्यों और कौन खोज रहा है बस देखता जा उस खोजनेवाले का सच - अरुण  

संवेदनशीलता (contact ness)

जबसे दिल का दौरा पड़ा है संगदिल ने दिल को है जाना   Though heart is in the body but body is rarely aware of it. -अरुण   

ये ‘एक’ हुआ क्या ?

खयालों से बना मन, बनी जिन्दा शख्सियत सारा जहान जबकि हुई, ‘ एक ’ हकीकत इंसा को समझ आएना, ये ‘ एक ’ हुआ क्या ? देता रहा खयाल को ही,   सारी अहमियत -अरुण