समाधान-दायक ज्ञान
हर दृष्टि किसी कोण से ही साधी जा सकती है जिस दृष्टि का कोई भी कोण नहीं या जो दृष्टि कोण-विरहित है उसके समक्ष जो भी संवेदित होता है वह ज्ञान है परन्तु किसी कोण या तर्क के माध्यम से जो भी दिखता है वह नए प्रश्नों को जननेवाला अर्ध-ज्ञान है जिसमे जानने के लिए कुछ न कुछ बच ही जाता है वह समस्या-निवारक हो सकता है, समाधान-दायक नहीं -अरुण