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सत्य समयातीत

जिसकी कोई सीमा है उस की ही हम संकल्पना कर सकते है, आदमी जिस समय की बात करता है वह उसकी सीमित कल्पना का प्रतिफल है जब उसका चिन्तन सीमा-रहित हो जाता है तब उस चिंतन में सनातन ( eternal) की समझ जाग उठती है और इसीलिए ऐसा चिन्तक अपनी भाषा-अभिव्यक्ति में सत्य को समयातीत कहता है -अरुण
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श्रद्धा है हिम्मत जबकि विश्वास है केवल मानसिक सहारा

सत्य की खोज में जुटे रहने की हिम्मत का नाम है श्रद्धा. जो जाना हुआ है और जो अभी भी जानना बाकी है, इन दोनों के प्रति लगे मोह को श्रद्धा नहीं...विश्वास कहना होगा. जो जाना नहीं जा सकता,... जो केवल हुआ करता है ...उसे ही अज्ञेय यानि सत्य कहें. सत्य के प्रति खोजपूर्ण समर्पण के लिए.. हिम्मत जरूरी है..ऐसी हिम्मत श्रद्धा से ही फलती है. -अरुण  

‘सुरक्षा’ हमेशा ‘आजादी’ पर जलती रही है

‘ सुरक्षा ’ हमेशा ‘आजादी’ पर जलती रही है   ******************************* पिंजड़े में अपने को सुरक्षित समझता पंछी..खुले आकाश में विचरते पंछी के पंखों की फडफडाट सुनकर ..उसे आवारा, भटका, बिगड़ा हुआ... समझता आया है. वह यह नहीं देख पाता कि उसके ही भीतर..इर्षा और असंतोष की चिंगारियां फडफडा रहीं हैं   -अरुण

इसपर गौर करें

जिंदगी को पढ़नेवाले लोग, अक्सर गलत निष्कर्षों तक पहुँचते है, क्योंकि संभावना यही होती है कि..जिंदगी को पढ़ने से पहले ही वे निष्कर्षों पर पहुंचे हुए होते है -अरुण    

ध्यान (Meditation) मनोभंजन है मनोरंजन (leisure time activity) नहीं.

Meditation को लेकर कई धारणाओं और practices का जिक्र होता रहता है. कोई कहता है.. मै रोज कुछ समय या हफ्ते में एक दिन मंदिर या पूजा स्थल जाकर शांत बैठ जाता हूँ, किसी को कहते सुना कि किसी मूर्ती या object पर ध्यान केन्द्रित करता हूँ, कोई किसी बाबा या संत की समाधी स्थल पर जा कर साल में एक या दो बार meditation कर अपनी साल भर की परेशानियों को दूर करने की बात करता है, कोई नामस्मरण में घंटे, दिन या महीनों बिताता है.... और इसतरह की कई बाते सुनी कही जाती रही हैं. थोड़े में, अपनी रोजाना की routine life से हटकर एक विशिष्ट ढंग की साधना को आदमी Meditation का नाम दे देता है. ध्यान रहे कि जीने के लिए चौबीसों घन्टे श्वासोंश्वांस जरूरी है. यह किसी विशिष्ट समय, ढंग या स्थलपर की जाने वाली कृती या साधना का नाम नहीं है. इसीतरह, दैनिक उपयोगी और उपद्रवी भ्रमों से मुक्त जीवन जीने की प्रवृति केवल कुछ क्षणों, दिनों महीनों या सीमित समय अवधि से सरोकार नहीं रखती. ध्यान की यह गतिविधि (movement) अगर चौबीसों घंटों सध सके तभी routine   wordly living के साथ साथ spiritual   living   संभव है. Spiritu...