रुबाई ******** तमन्ना ही वो दुनिया है तमन्ना ही जहाँ चलती तमन्ना अहमियत की होड में, बेसुध हुए चलती तमन्ना ख़्वाहिशों की हर मुराद-ओ-ख़्वाबकी ताक़त सही ताक़त वही जब जिंदगानी होश में चलती - अरुण
रुबाई ********* राह काँटों से भरी है ?....बदलने से... कुछ न होगा पाँव ही तो नर्म हैं.. कर लो कुछ भी...कुछ न होगा राह से तुझको शिकायत या शिकायत दर्द से है? दर्द को नज़दीक कर लो.. फिर चलो... फिर कुछ न होगा - अरुण
रुबाई ******** दुनिया में जितने बंदे उतने ही होते आलम आपस में आलमों के रिश्ते बनाते आलम आलम में आलमों की गिनती गिनी न जाए जिसमें सभी समाए सबका वही है आलम - अरुण
रुबाई ******** पहुँचने में लगे गर वक़्त तो मुश्किल समझने में लगे गर वक़्त तो मुश्किल जो पल में पहुँच जाता... समझ जाता है समझ उसकी* बड़ी अद्भुत निराली, पहुँचना मुश्किल अरुण उसकी = दिव्य दृष्टि वाला **********************************************
रुबाई ****** ख़्वाबों के दीप भीतर इक रौशनीसी फैले इस रौशनी में चलते दुनिया के सारे खेले करवट बदलती भीतर जबभी कभी हक़ीक़त कपती है रौशनी....उठते हैं जलजले - अरुण
रुबाई ********* जबतक चले ये साँस जीता हूँ मर रहा पल पल लहर है मेरी सरिता सा बह रहा फिर भी जनम मरण की चर्चा का शौक़ है मुझसे बड़ा न मूरख दुनिया में पल रहा अरुण