एक शेर ******** पल पल बदलती है.. ये कायनात....अपना पैतरा मेरी मन दौड़ इस बदलाव से रखती मुझे गाफ़िल अरुण इसपर ग़ौर करें *************** लगाव भी है अलगाव भी है एक ही वक़्त अभाव भी है और भाव भी है एक ही वक़्त मगर इंसान को.... इसका न कोई होश है वह अच्छा और बीमार भी है एक ही वक़्त अरुण एक शेर ******** यादों को ही भूत कहो........कहो भूत को याद याद बनी है जीवन सबका.. भूत जगत अवतार अरुण एक शेर ********* हवा पे उड़ रहे बादल को.... कुछ भी है नहीं कहना मगर उसमें भी अपने मन मुताबिक़ चित्र देखे आदमी अरुण एक शेर ********* साँस के चलने से पहले जो जैसा था वैसी ही है दुनिया साँस के चलते भी अरुण मुहब्बत क्या है? **************** मुहब्बत ऐसी नजदीकी का नाम है जिसमें न दूरी है, न मजबूरी है, न मिलकियत है और न है कोई नीयत... जिसमें दो नहीं होते और न ही गिना जा सके ऐसा कोई एक ही होता है... मुहब्बत में न कोई लगाव है और न ही कोई अलगाव, न कोई उलझाव और न ही है कोई सुलझाव केवल होता है भाव ही भाव -अरुण दो बातें ******** मुहब्बत ऐसी धड़कन है जो सम...