सारे मेरे रिश्ते, मेरी दुनिया है

सारे मेरे रिश्ते, मेरी दुनिया है

मेरी दुनिया ही - ‘मै’ हूँ

अगर न जानते हुए इस ‘मै’ को

कुछ भी करूँ

तो वह कुछ न करने के बराबर ही है

.............................................. अरुण

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