आनंद और रंजन


सृष्टि के सोंदर्य का
प्रत्यक्ष दर्शन
दृदय को आनंद से भर देता है
परन्तु प्रत्यक्ष दर्शन की
स्मृति या कल्पना या विवेचन
केवल मन को रंजित करता है
आनंद नही देता
- अरुण

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