Sunday, May 1, 2016

१५ अप्रैल हिंदी

15 April 2016
एक शेर
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जिसके लिए बदन हो किरायेका इक मकान
उसको न चाहिए कुई चादर मज़ार पर
-अरुण
एक शेर
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मौज उठती ओ उठाती है........ कई मौजों को
आदमी उठ्ठी लहर.. इसके सिवा कुछभी नही
- अरुण
एक शेर
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जैसी लगती वैसी होती है नही ये जिन्दगी
है यही कारण के सच कभी नही देखा गया
- अरुण
एक शेर
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जो जी ली जिंदगी उसीको नये से जीना
फिर कहना कि है ये नई .... सच नही
- अरुण
एक शेर
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एक पल ही जिंदगी है मगर हमको क्या पता
हमने तो याद-ओ-खाब से रिश्ता बना लिया
- अरुण
एक शेर
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अपने ही जहन्नुम में साँस लेते हुए
देखते खाब तो जन्नत के ख़्यालमें डूबे
- अरुण
एक शेर
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रुक न सके... तन-मन से.. जिंदगी का धुआँधार बहाव
एक दिन तो टूटेंगे ही.... ये किनारे, ये बाँध और पड़ाव
- अरुण
एक मुक्तक
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पूरीतरह से साँस लो पूरीतरह से छोड
आधीअधुरी जिंदगानी काम की नही
- अरुण
बेहतर है नज़ारों से नज़ारों को देखना
आधीअधुरी नज़र किसी काम की नही
- अरुण
एक शेर
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देखना और दिखना एक ही काम के दो नाम
साकारना यह सत्य जीवन में...है सत्यकाम
- अरुण
एक शेर
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मन में अपने जैसे झांका.....दिख पड़ा सारा जहाँ
सब तरफ़ जा जाके देखा अपना ही मन है वहाँ
- अरुण
एक शेर
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आसमान में पंछी होता या पंछीमें आसमान
जो जैसा है वैसा है जिसको जैसा भाए मान
- अरुण
एक शेर
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पढ़ेपढाये सवालों के उत्तर भी पढेपढाये
कठनाई में.......... किसी काम न आये
- अरुण
एक शेर
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सारा बीता इकट्ठा ही... जी उठता
और हर नये पल को खाता रहता
- अरुण
एक शेर
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‘बिन बोये मिलता नही’ नही कथन यह झूठ
‘बोने से निश्चित मिले’.. यह भी कहना झूठ
- अरुण
एक शेर
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जहांतक ध्यान है तेरा वहांतक स्थान है तेरा
जो केवल खोपड़ी में जी रहा जीवित नही है
- अरुण