Thursday, February 28, 2013

सपनों भरी है जिन्दगी



दिन के सपने रात के सपनों पे हंसते हैं
और फिर कब नींद से जा मिलेते हैं -  
इसका उन्हें पता ही नही,
रात और दिन की इस सपनों भरी जिन्दगी ने
सपनों के बाहर क्या है
इसे कभी जाना ही नही है
-अरुण    

Tuesday, February 26, 2013

दृश्य, दर्शन और दर्शक



दृश्य का स्पष्ट दर्शन पाने वाला दर्शक
स्वयं के प्रति सोया होता है,
स्वयं पर ध्यान ज़माने वाला,
दृश्य पर सो जाता है.

दृश्य और दर्शक दोनों पर
एक साथ जागनेवाला ही
दृश्य, दर्शन और दर्शक – तीनो के बीच का भेद
पूरी तरह खोकर सृष्टि के एकत्व को देख लेता है
-अरुण    

Monday, February 25, 2013

सत्य-खोज की विशेषता



सत्य की खोज का हल या तो
पूरा का पूरा गलत है या
पूरा का पूरा सही,
क्योंकि जो मूर्छित है -
पूरा का पूरा ही मूर्छित है और
जो जाग गया –वह पूरा का पूरा ही जागा है
-अरुण  

Friday, February 22, 2013

हम खुद ही हैं रूकावट



भगवान खोजने या
पाने की चीज नही, होने की चीज है.
वैसे तो हम भगवान हुए (Being) ही हैं
पर अपनी ही रूकावट के कारण
इसका बोध नही कर पा रहे
-अरुण

Thursday, February 21, 2013

यह अभिव्यक्ति का अभियान



अंधेरों से जुड़े हैं प्राण
उजाला चाहता हूँ
सपने बदल बदल कर
जागना चाहता हूँ
ये परस्पर विरोधी प्रयास
चलेंगे जब तक,
चलेगा अभिव्यक्ति का यह
अभियान तबतक
-अरुण