Sunday, June 30, 2013

पल पल बनकर जीना होगा



जिंदगी हर पल में जीती है,
और आदमी ?
हर पल के बाहर
हर पल में जीने के लिए आदमी को
पल पल बनकर जीना होगा.
हो तो ये रहा है कि
आदमी की जिंदगी का हर पल
आदमी बन कर जी रहा है
-अरुण
 

Saturday, June 29, 2013

जबतलक जुदा जुदा हैं दिमाग और दिल



कुछ भी खोया नहीं
फिर भी खोजना है शुरू
खोजने वाले के शुरू होते ही
खोजने का ख्याल शुरू  
किया खोज के ख्याल ने ही
खोना शुरू

ऐसे में जिंदगी भी कट जाएगी
पर न होगा कुछ भी हासिल
जबतलक जुदा जुदा हैं
दिमाग और दिल
-अरुण
  

Wednesday, June 26, 2013

समझने के दो तरीके



किसी भी बात को समझने के दो तरीके हैं
एक है उस बात के बारे में जानना और
दूसरा है उस बात को जीना
जानना काम है मन, बुद्धि और स्मृति का
और जीना काम है ह्रदय की अवधानता का.
जानना जानते हुए भी न जानने के बराबर है
और जीना न जानते हुए भी
पूरीतरह जान लेने के बराबर
-अरुण    

Tuesday, June 25, 2013

मौत किसी को नहीं जानती



ये तो याद नहीं कि
मेरे जन्म के समय
मुझे मिलनेवाली जिंदगी ने
मेरा नाम पता ठिकाना मकसद और मंजिल के बारे में
मुझसे पूछा था की नहीं?
पर यह तो मै साफ साफ देख रहा हूँ कि
सामने खड़ी मौत को भी इस बात में
कोई रूचि नहीं है
कि  मै कौन हूँ, किस जातपात,
देश सूबा से ताल्लुक रखता हूँ,
जिंदगी में मैंने क्या कमाया या खोया हैं.
उसे तो इस बात से भी कोई सरोकार नहीं कि
मै आदमी हूँ, या कोई और प्राणी या
किसी जंगल में पला पेड़ पौधा
-अरुण