Monday, January 31, 2011

सार असार संसार

जो है अस्तित्व में

और जिसके होनेपन में अस्तित्व है

उसे काया कहें

जो नही है अस्तित्व में फिरभी

अस्तित्व जिसके होनेपन को

ले आता है

उसे माया कहें

और काया माया के इस

सार असार को ही

संसार कहें

.......................... अरुण

Sunday, January 30, 2011

दुःख का जन्म ही थम जाए

दुःख दूर नही किया जा सकता है

हाँ , उसे टाला जा सकता है

दुःख का कारण दूर हो जाए

बस

परन्तु यह कारण

कहीं बाहर नही

दुःख की अनुभूति में ही

छुपा हुआ है

जिसे त्रयस्थ भाव से देखना बन पड़े

तो दुःख का जन्म ही थम जाए

................................ अरुण


Saturday, January 29, 2011

नम्रता क्यों अच्छी लगती है?

नम्र व्यक्ति का व्यक्तित्व

हमें अच्छा लगता है

ऐसे में सवाल उठना चाहिए

क्यों अच्छा लगता है ?

क्या इसलिए कि नम्रता हमारे लिए

सहज नही हो पाती

या इसलिए कि उसकी नम्रता

अप्रत्यक्ष रूप से

हमारे अहंकार की तुष्टि है

.......................................... अरुण


Thursday, January 27, 2011

समझ और ज्ञान

सामने जो भी वस्तु खड़ी हो

आईने में पूरी की पूरी उतर आती है

टुकड़ों टुकड़ों में प्रतिबिंबित नही होती

अंतर-दृष्टि भी ऐसी ही अखंडित हो तो

समझ (Wisdom) फलती है

अन्यथा केवल

ज्ञान (Knowledge) ही उत्पन्न होता है

सत्य-बोध के लिए समझ की

जरूरत है ज्ञान की नही

........................................ अरुण


Tuesday, January 25, 2011

योगाभ्यास प्रतिबन्ध है, इलाज नही

योगाभ्यास

बीमारी होने से पहले ही

आदमी को

उससे बचाता है

ऐसी योग-साधना जिन्हें

सहज हो चुकी है उनका मार्गदर्शन

उपयोगी है सिर्फ उनके लिए

जो अभी बीमार नही है,

उनके लिए नही

जो किसी बीमारी से पीड़ित हैं

........................................ अरुण

Monday, January 24, 2011

वक्त

ख्याल चलते हैं समय चलता नही है

आदमी का ये जगत थमता नही है

आदमी ही गिन रहा है वक्त की परतें मगर

वक्त इंसा को कहीं गिनता नही है

.................................... अरुण

Tuesday, January 18, 2011

समझ संवाद-विवाद से परे

संवाद हो या विवाद दोनों के लिए

दो या दो से अधिक टुकड़ों

(पक्षों या व्यक्तियों) का होना

जरूरी है

समझ एक की एक है जिसमें

अखंडत्व होता है

परन्तु यदि मन के भीतर दो या

दो से अधिक टुकड़े संवाद कर रहे हों

तो वह समझ नही, वह तो

मन के भीतर चलनेवाला

संवाद या विवाद है

विचार तो टुकड़ों के बीच के संवाद/विवाद से

फलता है

जब विचार निष्क्रीय हो जाता है तभी

समझ की संभावन फलती है

............................................... अरुण


Sunday, January 16, 2011

मनरुपी जहाज

सागर की लहरों पर एक तैरता जहाज

और जहाज के डेक पर आदमी की बस्ती

इस बस्ती में अशांति है

आदमी आदमी के बीच झगडा है,

वादविवाद है

परन्तु इससे सागर में कोई आन्दोलन पैदा नही होता

परन्तु यदि झगडा इस स्तर पर पहुंचे कि

युद्ध शुरू हो जाए,

एक दूसरे पर बमबारी होने लगे और

सारा जहाज ही डगमगाने लगे तब शायद

सागर की लहरों में उफान जैसा आन्दोलन होने लगे

पर हर स्थिति में सागर को कई फर्क नही पडता

सागर एक त्रयास्थ की तरह सारा तमाशा निहारता रहेगा

ठीक इसी तरह

अस्तित्व के सागर में

देह की लहरें हैं और इन लहरों पे

मानवीय मन एक जहाज की तरह

तैर रहा है

अपने भीतर विचार-स्वप्नों की

एक बस्ती लिए

........................................................ अरुण

Saturday, January 15, 2011

जागना नींद में और जागना नींद से

नींद में जागना
इस समाजधारी आदमी ने
अपने जन्म के उपरांत सीख लिया है
परन्तु नींद से जागना
अलग बात है
शायद बिरले ही इस तरह जागे होंगे
.................................................... अरुण

Tuesday, January 11, 2011

मिशन यानी करुणा नही

साधारणतः

अच्छे उद्देश्य या हेतु से

किया गया

हर काम सही माना जाता है

परन्तु अगर नींद में खोया आदमी

सही हेतु से भी कोई काम करे

वह अच्छा नही हो सकता

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यह ईश्वर की सेवा है - ऐसा मानकर

आदमी के समाज में

आदमी की सेवा करने वालों के काम को

सराहा जाए यह स्वाभाविक ही है

परन्तु अध्यात्मिक स्तर पर

यह भी स्वार्थ-कर्म ही है

क्योंकि यह करुणा (दया नही)

से फला काम नही है

.............................................. अरुण


Saturday, January 8, 2011

जीवंत जीवन

आदमी देह-मन से

चुस्त हो अथवा सुस्त

दोनों ही अवस्था में

वह भटका हुआ है

जब चुस्त होता है

तब विचारों में और जब

सुस्त होता है तब स्वप्न में

भटक जाता है

अपनी इस पल पल की

भटकन के प्रति जो सावधान और सजग हो

उसी का जीवन जीवंत है

......................................... अरुण


Friday, January 7, 2011

आचरण-परिवर्तन-संवाद कर्ताओं के लिए

बात कहनी है सही,

सही अंदाज में मगर

जिससे सुननेवाले की

बदल जाए डगर

......................... अरुण