Saturday, September 12, 2009

कुछ शेर

चन्द ही लोग क्यों न हों अच्छे यहाँ
भीड़ जुटाने के लिए काम आते नाम उनके

जिंदगी प्यास जगाने ओ बुझाने का सफर
कोई होगा? के जिसे प्यास का एहसास नही

मर गया वो लौटकर आता नही
पानी के बुलबुलों में रिश्ता मत जोड़
.................................................. अरुण

Monday, September 7, 2009

कुछ शेर

अपने कदम किधर हैं इसका पता नही
अगला मुकाम क्या हो यह तय हो चुका

तू राजे महब्बत की बातें न कर
बातों से मुहब्बत नही की जाती

एक किस्सा ढल चुका है जेहन में
जिन्दगी की लिख रहा जो इक किताब
.................................................. अरुण

Sunday, September 6, 2009

कुछ शेर

दुनिया से मांग ली है ये अपनी गुलामी
लोगों को कोसने का कारण नही हमें

'ये मेरा- नही, मेरा', दोनों झगड़ रहे
आपस में बांटते है मगर 'मर्ज' बराबर

............................................... अरुण

Saturday, September 5, 2009

कुछ शेर

अब तक तो माजी ही मेरा जिन्दा
मै हूँ तो कहाँ हूँ, न ख़बर मुझको

कब आदमी की आदमी से होगी मुलाकात
अभी बस मिल रहे, आपसी तआरुफ़

बड़ा मुश्किल गुजरना आलमी रिश्तों की गलियों से
कभी वे फूल होते तो कभी काटों से चुबते हैं
................................................................... अरुण

Friday, September 4, 2009

कुछ शेर

शायद यही वजह कि तडपता है -दिल
तुम्हें पाने से पहले, तुम्हें पा चुका है दिल

ये दर्द उठाया है दिली ख्वाहिश ने
हमदर्द करे भी तो करे कैसा इलाज

अपनी तस्बीर बनाई है दिल के कोने में
दिनरात उसीसे करता बातें
............................................. अरुण

Thursday, September 3, 2009

कुछ शेर

कोई बंदा- नही ऐसा- जिसे कोई- नही है डर
अगर होगा तो उसकी साँस में जन्नत की खुशबू है

ख़ुद से ही- देखता हूँ तमाशा जहान का
ख़ुद को भी- देखता, जो जहां से जुदा नही

टूटा जो कुदरत से रहा सहमा सहमा
यही डर जो खुदा को ढूँढता है
.................................................... अरुण

Wednesday, September 2, 2009

कुछ शेर

ख्याले उलझन को 'नजर' देखे
तो अचानक सुलझ जाते हैं ख्याल

तजुर्बे हो न हों, 'नजर' साफ हो
ऐसों का दिल हुआ मासूम

जिम्मेदारी ओ खतरों से भागनेवाले
किसी 'दामन' को थाम लेते हैं
................................................ अरुण

Tuesday, September 1, 2009

कुछ शेर

दिमाग बनाता चीजें, भीतर बाहर
जिंदगी उनसे उलझकर रह गई

इस दुकाँ से उस दुकाँ तक आँख गुजरी बेखबर
देख लेना अब जेहन में झाँककर सारा बजार

प्यार तो प्यार, नही यार से जज्बाती जूनून
एक मंजर ऐसा जिसमे सभी यार ही यार
................................................................ अरुण