Monday, September 30, 2013

गौर करने योग्य हैं ये पंक्तियाँ



अँधेरे को न अँधेरा मिटाता है कभी
‘नींद में’ जागनेवाला,
‘नींद से’ न जागता है कभी
अंधरे को न पता है अँधेरे का और ...
न देखी है नींद ने कभी बेहोशी
-अरुण  

Sunday, September 29, 2013

पशुत्व से मनत्व और मनत्व से सृजनत्व



पशुत्व (Animation) से मनत्व (human)
और मनत्व (human) से
सृजनत्व (Creation ) की दिशा में
आदमी उन्नत हो सकता है.
अपना पशुत्व यदि ठीक से न समझा गया तो
मनुष्य ठीक से मानव नही बन पाता और
अपने मनत्व को यदि मानव ठीक से न देख ले
तो वह सृजन की अवस्था में
उदित नहीं हो पाता
-अरुण   

Saturday, September 28, 2013

मस्तिष्क और मन



मस्तिष्क संवेदनाओं का संयोजनकर
प्रत्यक्ष ज्ञान अनुभूत करता है
और मन
इस अनुभूत प्रत्यक्ष ज्ञान का संयोजन कर
संकल्पनाएँ रचता है
इसतरह मस्तिष्क सृष्टि से सीधा संपर्क करता है
तो मन अपनी संकल्पनाओं के माध्यम से ..
-अरुण   

  

Friday, September 27, 2013

दिल केवल शायरी का विषय



हर दो या अनेक लोगों के बीच
अगर दिल के रिश्ते बनें तो कैसे बनें ?...
बीचमें मन की छदमी दीवार जो  
खडी है.
बीते अनुभवों, धारणाओं, घावों,
मन-भावी यादों ... और ऐसी ही कई
बातों से बनी इस दीवार से ध्वनित
इशारों से ही सारे रिश्ते संचालित हो रहे हैं
दिल केवल कविताओं, कथाओं  और शायरी का
विषय बन कर रह गया है
-अरुण

  

Thursday, September 26, 2013

जीवन-रथ और दुनिया की भीड़



दुनिया की भीड से गुजरते हुए
अपना रास्ता बनाने वाले को
मन की लगाम कसते हुए
अपना जीवन रथ ठीक दिशा में
ले जाना पड़ता है
जो निर्मन हो पातें है
उनका जीवन रथ बिना किसी लगाम और
बिना किसी टकराहट के
भीड़ से सहज गुजर जाता है
-अरुण