Sunday, September 30, 2012

क्षण-बिंदु



क्षण-बिंदु बरसते और ठहरते हैं
बोझ बनकर,
एक भी बिंदु इस तरह नहीं बरसा
कि जिसमें
ये जिंदगी ठहर जाए
क्षण बनकर
-अरुण  

Saturday, September 29, 2012

विचार-गति



होश-बेहोशी की मिलीजुली
अवस्था को प्राप्त गति से
विचार चलने लगते हैं,
केवल होश ही होश हो तो
निर्विचार.... और केवल (या प्रमुखतःसे)
बेहोशी हो तो अविचार का जन्म होता है
सत्यावस्थी निर्विचार का धनी हैं और
तामसी अविचार का शिकार,
विचार करते रहना
रजोगुणी की प्रवृत्ति है
-अरुण  

Friday, September 28, 2012

समाधान



हर हल या उत्तर
के भीतर से
कई प्रश्न या समस्याएं उभर आती हैं
जिस हल या solution के बाद कोई भी
सवाल न उठ्ठे वही है समाधान
वही है समाधी
-अरुण

Thursday, September 27, 2012

पूरा पूरा आकाश



देखना था
पूरा पूरा आकाश
पर देखे उसके टुकड़े टुकड़े.
टुकड़ों पर दुकड़े रचकर
जो बनी रचना उसीको
मैंने आकाश समझा है
टुकड़ों से बने आकाश में
अब उभरा है
काल और अवकाश
-अरुण    

Wednesday, September 26, 2012

वस्तुनिष्ठ निरिक्षण



सत्य शोध और वस्तु-शोध
यानि तत्व-दर्शन और विज्ञान,
दोनों के लिए ही वस्तु-निष्ठ निरिक्षण
जरूरी है
फर्क इतना ही है कि
विज्ञान में निरिक्षण,
निरीक्षक के द्वारा किया जाता है
जबकि तत्व दर्शन में यह
स्वयं तत्व के द्वारा ही घटता है
-अरुण