रुबाई

रुबाई
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सागर में मछली है .........मछली में सागर है
पीढ़ी दर पीढ़ी का ........इकही मन-सागर है
सागर से मुक्त कहां ..मछली जो कुछ भी करे
जबतक वह गल न जाय बन न जाय सागर है
- अरुण

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