Sunday, April 9, 2017

मुक्तक

मुक्तक
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डूबजाना समंदर में... है लहर की फ़ितरत
'आगे क्या?'- यह सवाल भी साथ में डूबे

मोक्ष मुक्ती की करो ना बात अभ्भी
बंध बंधन का...समझ लो...बस बहोत है

न ही उम्मीद कुई और न ही मै हारा हूँ
पल पल की जिंदगी ही.. अब जिंदगी है
-अरुण

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