सच्चाई ! तुम छुपी हो कहाँ?



संमंदर की लहरों पे पसरा नजारा
नजर में वही सो न दिखती है धारा
नज़ारों के रिश्ते नज़ारों की दुनिया
छुपी जाए सच्चाई, बचता.. किनारा
-अरुण

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