जीवन का मक्सद


जो पूरा का पूरा हो
न बटा हो कहीं से भी,
जिसके न बाहर हो कुछ भी
न भीतर,
उसे न कोई आकार है और
न वह है कोई भी प्रकार
क्योंकि वह है पूरा का पूरा
अपने इस पूरेपन में
लौट आना ही है
जीवन का मक्सद
- अरुण    

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