Saturday, September 14, 2013

षड रिपु



ऐसा कहा जाता रहा है कि
आदमी के आध्यात्मिक उत्थान के मार्ग में
षड रिपु - काम क्रोध लोभ मोह मद और मत्सर-
बाधा बने रहते है.
ये बाधाएँ छह नहीं हैं, एक ही के छह रूप हैं.
जहाँ अपना अलग अस्तित्व या अहंता जगी,
ये सभी एक दुसरे से अपना अपना रूप धरे चले आते हैं.
काम से ही ममत्ववश मोह, मोह से लोभ, लोभ से मत्सर,
और परिणामतः क्रोध फूटता है. अहंता ही मत्सर लाती है या  
मद का संचार जगाती  है
-अरुण  

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