Saturday, June 14, 2014

श्रद्धा है हिम्मत जबकि विश्वास है केवल मानसिक सहारा



सत्य की खोज में जुटे रहने की हिम्मत का नाम है श्रद्धा. जो जाना हुआ है और जो अभी भी जानना बाकी है, इन दोनों के प्रति लगे मोह को श्रद्धा नहीं...विश्वास कहना होगा. जो जाना नहीं जा सकता,... जो केवल हुआ करता है ...उसे ही अज्ञेय यानि सत्य कहें. सत्य के प्रति खोजपूर्ण समर्पण के लिए.. हिम्मत जरूरी है..ऐसी हिम्मत श्रद्धा से ही फलती है.
-अरुण

 

1 comment:

Ankur Jain said...

बहुत ही मार्मिक बात कही आपने अपनी इस पोस्ट में।।।