Monday, January 19, 2015

रुबाई

रुबाई
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सतह पे लहरें हैं, .....हैं संघर्ष के स्वर
संथतल पर शांतिमय एकांत का स्वर
सतह-तल दोनों जगह ....चैतन्यधारा
सतह..लहरें..संथतल सब एक ही स्वर
-अरुण  

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