रुबाई

रुबाई
********
सतह पे लहरें हैं, .....हैं संघर्ष के स्वर
संथतल पर शांतिमय एकांत का स्वर
सतह-तल दोनों जगह ....चैतन्यधारा
सतह..लहरें..संथतल सब एक ही स्वर
-अरुण  

Comments

Popular posts from this blog

तीन पोस्टस्

पाँच विचार

नज़र से नज़रिये से नही