Friday, January 23, 2015

रुबाई

रुबाई
********
जब तलक ना आग लग जाती... न छिड़ जाती लड़ाई
तब तलक ना साथ आकर क़ौम.....'मन' पर सोच पाई
सब के सब ..........अपनी ही अपनी दास्ताँ में गुम हुए
ना कभी इंसानियत की.......... ..चेतना की समझ पाई
- अरुण

No comments: