Saturday, January 24, 2015

रुबाई

रुबाई
*******
खड़ा हो सामने संकट भयावह काल बनकर
निपटना ही पडे ..उससे हमें  तत्काल बढ़कर
निरर्थक.. सोच चर्चा भजन पूजन..ये सभी तो
दिमागी फितूर... बैठे आदमी के भाल चढ़कर
- अरुण

No comments: