Sunday, January 4, 2015

रुबाई

रुबाई
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हवा से लहरें उठ्ठे टकराए लहर से लहर... दरिया ख़ामोश है
हो हल्की हलचल या के हो तूफ़ानी क़हर ... दरिया ख़ामोश है
बनते बिगड़ते रिश्तों का होश-ओ-असर सतहे जिंदगी पर ही
तहख़ाने में झाँक के देखो सब्र-ओ-सुकून है..जिंदगी ख़ामोश है
- अरुण

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