Thursday, December 2, 2010

सत्य की खोज को समर्पित

एक दोहा

मछली से क्या पूछना पानी कैसा होत

पानी जिसके प्राण हैं पानी जीवन ज्योत

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एक चिंतन

मै कौन हूँ ? इस सवाल का

कोई जबाब नही

यह एक सघन-गहन खोज है

जिसका कोई अंत नही

.............................................. अरुण


1 comment:

अशोक बजाज said...

सुन्दर प्रस्तुति ,बधाई !