Wednesday, December 15, 2010

अच्छापन या सच्चापन

सभी धर्मों का आशय इतना ही है कि

आदमी में सत्पुरुष अवतरित हो

ऐसा होने के लिए

आदमी क्या करे, यह कोई भी धर्म

न सिखाता है और न सिखा सकता है

इस प्रकार की सीख देने के प्रयास में

लौकिक अर्थ में कई तथाकथित धर्म

प्रचलित हुए पर सभी अधिक से अधिक

अच्छापन सिखा सके सच्चापन नही,

क्योंकि

सच्चापन आदमी की अपनी निजी खोज से फलता है

किसी सामाजिक अभियान से नही

...................................................... अरुण


1 comment:

वन्दना महतो ! said...

क्योंकि

सच्चापन आदमी की अपनी निजी खोज से फलता है

किसी सामाजिक अभियान से नही...... बिलकुल सही कहा आपने.