Thursday, December 9, 2010

जिंदगी छोटी, बहुत छोटी.....

जिंदगी छोटी बहुत छोटी, बहुत छोटी है

ना समझ पाए जेहन जिसकी पकड़ मोटी है

और इसीलिए जेहन या मन से

पार जाकर ही जिंदगी को जाना जाता है

.......................................................... अरुण

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