प्रकाश’ का तात्पर्य **************** प्रकाश के प्रभाव को उजाला कहिए और प्रकाश के अभाव को अंधेरा अस्तित्व, जब समझ (प्रकाश) में आए, ज्ञान (उजाला) कहिए और जब वह समझ के दूर (अभाव) हो कहिए उसे अज्ञान (अंधेरा) -अरुण ‘अपना’ ही खो जाए तो ******************** अपना कुछ खो जाए तो दुख ही दुख यह ‘अपना’ ही खो जाए तो ख़ुशी ही ख़ुशी…टिकाऊ ख़ुशी -अरुण कैसे नादान हैं हम? ************* अजिंदे भूत ने क़ब्ज़ा कर रखा है इस जिंदगी पर और छोड रखा है दो साँसों और दिल की धड़कनों का सहारा जीने के लिए एक हम हैं ऐसे मूरख कि भूत में समायी हुई ग़ैरमौजूदगी से ही पूछ रहें हैं अपनी मौजूदगी के बारे में उठ्ठे सवाल -अरुण
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MAN TO EK LAHAR HAI
JO KABHI HAI
KABHI NAHEE HAI
YE TO HAMARI EK KHAS AVASTHA HAI
AISI US PYARE KEE VYAVASTHA HAI