Saturday, October 16, 2010

दो तरह के आदमी


मन से जीने वाले आदमी की आँखें

जागती हों या सोयी हुई

दोनों ही स्थिति में वह आदमी

मन के भीतर है

जागा हुआ आदमी

नींद में हो या नींद के बाहर

दोनों ही अवस्था में

वह मन के बाहर है

.................................. अरुण

2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सही!

प्राध्यापक प्रकाश said...

दष्टांत देने से जटिल संकल्पनायें सहज समझ में आ जाती है।
मेरे जैसा बेवडा ए ए में आने के पहले चाहे पिया हो या शराब न पी हो शराबियत मे ही रहता है। लेकिन जैसे ही कोई शराबी ए ए के कार्यक्रम के भीतर प्रवेश करता है तो उसमे एक चमत्कार जैसा लगनेवाला परिवर्तन आ जाता है। वह फिर सोया हुआ हो या जागता हो, २४ घंटे इस बात से वाकिफ रहता है कि उसे सचेत रहना होगा। क्योंकि मन की-खयालो की दुनिया मे खो जाना ही सबसे बडा रोग है। और वास्तविकता का सामना करना ही रिकव्हरी है। शेक्सपीयर लिखता है कि भूलना ही सबसे बडी बिमारी है। याद रखना ही सबसे बडा उपचार है। अलबर्ट आइन्स्टाइन अपने सबसे बडे पागलपन का जिक्र करता है कि उसका भुलक्कडपन ही सबसे बडा पागलपन है क्यों कि एक ही गलती बार बार करने की उसकी आदत इसी भुलक्कडपन के वजह से प्राप्त हुयी थी।