Wednesday, October 6, 2010

लफ्जों की कश्तियों से.........

कहना उन्हें फिजूल सुनना जिन्हें सजा है

वैसा भी कह के देखा., जैसा उन्हें रजा है

लफ्जों की कश्तियों से बातें पहुँच न पाती

इक साथ डूबने का कुछ और ही मजा है

............................................. अरुण

3 comments:

वीना said...

अंतिम पंक्ति बहुत अच्छी है

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...सुन्दर

Udan Tashtari said...

जैसा उन्हें रजा है

-यह हिस्सा थोड़ा खटका...

बाकी बढ़िया....