Saturday, October 23, 2010

परन्तु मै अनुभव कर रहा हूँ कि -

मेरा जीवन अनुभव कर रहा है कि -

जो मेरी कुदरत को छूकर चला जाता है

वह है मेरा इतिहास

जो कभी भी नही आता, वह है भविष्य

और जो है, वह है

मेरा स्वयं

बिना किसी इतिहास

बिना किसी भविष्य

परन्तु मै अनुभव कर रहा हूँ कि

मेरी कुदरत को छूने वाला

इतिहास लद जाता ही मुझपर

मेरी याद बनकर

मेरी भवि- कल्पनाएँ

आगे कि तरफ घसींट रही हैं

मेरा वर्तमान

.......................................... अरुण

2 comments:

Vandana ! ! ! said...

बहुत सही अनुभव करा रही है आपकी ये कविता..... "मेरी कुदरत को छूने वाला इतिहास लद जाता ही मुझपर मेरी याद बनकर मेरी भवि- कल्पनाएँ आगे कि तरफ घसींट रही हैं मेरा वर्तमान"

-----यह पंक्तियाँ कुछ ज्यादा ही अच्छी लगी

POOJA... said...

परन्तु मै अनुभव कर रहा हूँ कि –
मेरी कुदरत को छूने वाला
इतिहास लद जाता ही मुझपर
मेरी याद बनकर
bahut pyaari lines... sundar...