Tuesday, November 4, 2014

मर चुका ही डर रहा है...

जो मर चुके क्षण
याद उनकी आज ज़िंदा है
याद को ही सौंप रखी
ज़िंदगी की बागडोर......
अब ज़िंदगी तो
मौत के ही हांथ ज़िंदा है
फिर भी डर है
मौत ना जाए निगल
जिंदगी के बचे पल
जिन पलों मे
मौत की ही साँस ज़िंदा है
- अरुण

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