We human beings , when desire more than our capability , we try to find some shortcut to fullfill these desires/dreams , this is the root of corruption . So , we should understand that - Whatever we deserve we get .
Mandira Mhaskar Granddaughter of Mr Narayan Mhaskar
प्रकाश’ का तात्पर्य **************** प्रकाश के प्रभाव को उजाला कहिए और प्रकाश के अभाव को अंधेरा अस्तित्व, जब समझ (प्रकाश) में आए, ज्ञान (उजाला) कहिए और जब वह समझ के दूर (अभाव) हो कहिए उसे अज्ञान (अंधेरा) -अरुण ‘अपना’ ही खो जाए तो ******************** अपना कुछ खो जाए तो दुख ही दुख यह ‘अपना’ ही खो जाए तो ख़ुशी ही ख़ुशी…टिकाऊ ख़ुशी -अरुण कैसे नादान हैं हम? ************* अजिंदे भूत ने क़ब्ज़ा कर रखा है इस जिंदगी पर और छोड रखा है दो साँसों और दिल की धड़कनों का सहारा जीने के लिए एक हम हैं ऐसे मूरख कि भूत में समायी हुई ग़ैरमौजूदगी से ही पूछ रहें हैं अपनी मौजूदगी के बारे में उठ्ठे सवाल -अरुण
इच्छा का संचार विचार की शक्ल लेता है और इच्छा आभासित होती है विचारक के रूप में.. मन है..इच्छा का संचार -अरुण लोग अच्छे हो न पाए पर दिख रहे अच्छे ‘अच्छाईयत’ का आजकल जो बाज़ार गरम है -अरुण जो हमने रची चीज़ें.. हमें ही ख़रीद लेती हैं और फिर, नया कुछ भी हमें रचने नही देती -अरुण दूसरों से पाए हुए चिराग़….अंधेरा हटाते नही, गहराते हैं -अरुण बदन-ओ-मन से उसे क्यों जुड़ाव हो हैं दोनों किराये पे मिले…… रहन वास्ते -अरुण
नज़र से नज़रिये से नही ******************** रास्ते पर रखकर अपनी चौकस नज़र चालक सुरक्षित गाड़ी चलाता है फिर, जिंदगी की गाड़ी क्यों हम, अपनी चौकस नज़र से नही, अपने नज़रिये से चलाते हैं ? -अरुण
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Mandira Mhaskar
Granddaughter of Mr Narayan Mhaskar