Sunday, September 7, 2014

प्रधान मंत्री मोदीजी का स्कूली बच्चों से संवाद

शिक्षक दिन के अवसर पर हुआ यह संवाद बहुत ही सहज,सरल, बोझविहीन एवं  बोधप्रद रहा । किसी भी मत या पक्ष विशेष की इसमें गंध न थी । संवाद का आशय एवं तरीक़ा बच्चों के साथ संपर्क बनाता हुआ दिखा, जिसमें सीख तो थी पर किन्हीं ' ऊँचे ऊंचे आदर्शों ' की बकवास नही । मोदीजी ने अपने निजी जीवन की घटनाओं और अनुभवों का जो ज़िक्र किया उसमें कुछ भी ख़ुद की बढ़ाई करने जैसा न था । जो भी कहा गया और सुझाया गया वह स्वाभाविक और व्यावहारिक था, उसमें किसी भी प्रकार का बनावटीपन या डायलाॅगबाजी न थी ।
देश चाहता है कि मोदी जी के माध्यम से देश की परिस्थिति और मनस्थिती में अनुकूल बदलाव आये । देश को 'अच्छे दिन', 'सुराज्य' जैसी मिथ्या नारेबाज़ी की कोई आवश्यकता नही है, देश को ज़रूरत है सिर्फ समसंख्यकभाव एवं हित की । ज़रूरत है अब  'अल्पसंख्यकी' मजबूरी और 'बहुसंख्यकी' अहंकार से देश को निजात दिलाने की ।
- अरुण

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