Thursday, September 11, 2014

व्यक्तिगतता Vs सकल मानवता

Clinical या psychological अर्थ में नही, बल्कि व्यावहारिक अर्थ में (मानवी) Mind -इस शब्द में,... brain,mind और उनका bodily manifestation.... इसतरह तीनों की...मिलाजुली आंतरिक  प्रक्रिया समाहित है और इसी अर्थ को अगर आधारस्वरूप स्वीकारा जाए.. तो.. यह कहना ग़लत नहीं कि मानवजगत मनुष्य का नही होता बल्कि उसके जीवंत Mind का ही जगत है । जो बिरले व्यक्ति..सकल मनुष्यजगत का जीवंत Mind होकर जागे, उनकी व्यक्तिगतता अनायास ही ओझल हो गई। ऐसे बुद्धों ने मनुष्य की व्यक्तिगतता या संकीर्णता को हर युग में कारुण्यमयी चुनौती दी है ।
- अरुण

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