Monday, December 8, 2014

दो रुबाई आज के लिए

दो रुबाई आज के लिए
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जाना नही.. जहान से क्या रिश्ता अपना
समझा के अलहिदा ही है...रास्ता अपना
साहिल पे खड़ा सोच रहा... पानी में खड़ा हूँ
लहरों से पूछता हूँ.. पता अपना
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रात दिन दोनों ही होते .........लाजवाब
जिंदगी की हर अदा है ........ बेहिजाब
जो भी है सब ठीक ही.. रब के लिए
अच्छा-बुरा तो आदमी का है हिसाब
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- अरुण

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