Thursday, June 24, 2010

शुद्ध लय शब्दों में खो गई

किसी भी गेय गीत में
धुन, ताल और शब्दों की संगती है
जब भी शब्दों को धुन में सुना जाता है
या धुन को शब्दों में उभारा जाता है तो दोनों
एक दूसरे में इतने घुलमिल गये होते हैं
कि लाख कोशिशों के बावजूद भी
न तो शब्दों को धुन से और न तो
धुन को शब्दों से अलग किया जा सकता है
जीवन क़ी शुद्ध लय में सांसारिक शब्द
इतने घुलमिल गये हैं कि अब
शुद्ध लय को ढूँढना मुश्किल बन गया है
.................. अरुण

3 comments:

उम्मेद said...

सांसारिक शब्द जाल में जीवन की लय तलाशती बेहतरीन कविता...दार्शनिक भाव-भूमि पर अवस्थित सुन्दर रचना हेतु बधाई।

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!

ana said...

shabd jaal me fanse jeevan ko shuddha laya ki nitanta avashyakta hai.......bas margdarshan ki avashyakta hai........bilkul satik lakhaa gaya hai