Monday, June 28, 2010

आइंस्टीन का टाइमस्पेस और मन

आइंस्टीन का टाइमस्पेस

मन को भी लागू है

अस्तित्व है एक का एक

कहीं भी न भेद, न अन्तर,

न अवकाश न दिशा और न ही आकार

बुद्धि ने अपनी सहुलियत के लिए

आरम्भ और अंत की कल्पना की और

इन दो काल्पनिक स्थल- बिंदुओं के बीच का अंतर

नापना चाहा और ऐसा करते

काल का ख्याल पैदा हुआ

मन के भीतर भी अंतर, आकार, दिशा की

अवधारणा होने से

मनोवैज्ञनिक काल या टाइम

प्रकट हुआ जान पड़ता है

.......................................... अरुण

1 comment:

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया.