Wednesday, July 14, 2010

क्षण ही जीवन

हर क्षण स्वतन्त्र है

न पिछले क्षणों से इसका

कोइ जोड़ है और

न अगलों से कोई लगाव

पर हमारी जिंदगी में

ऐसा नहीं क्योंकि

यह हमारी है और

इसीलिए यह पिछले क्षणों को

दुहराने और

अगलों (भविष्य) को

साकारने में लगी हुई है

यह हमारी है इसीलिए जिन्दा नहीं है

हमेशा गाडी हुई है

पिछलों और अगलों में

................................. अरुण





1 comment:

Sunil Kumar said...

सारगर्भित रचना बधाई