Saturday, July 3, 2010

देखने में हुई भूल ही है असत्य

सभी बुद्धों के कहने का तात्पर्य

यह है कि

सत्य तो हमेशा ही विद्यमान है

उसे देखने में हुई भूल के कारण ही

मानव-मस्तिष्क को

असत्य की बाधा होती है

और फिर असत्य ही

सत्य जैसा लगने लगता है

परन्तु जब अचानक ध्यान में

असत्य पूरी तरह,

गहराई से उतर कर,

पारदर्शी बन जाता है तब

उसके पार छुपा हुआ सत्य

प्रकट हो उठता है

मतलब - देखने में हुई भूल ही असत्य है

असत्य का अपना कोई अस्तित्व नहीं है

................................... ..........................अरुण


2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सत्य वचन...अच्छी लगी रचना