Thursday, July 8, 2010

दिखता तो है पर धुंधला धुंधला

मिचकाती आँखों से जिंदगी का सारा तमाशा

दिखता तो है

पर धुंधला धुंधला

बात समझ में आती तो है पर

थोड़ी थोड़ी

इन धुंधली धुंधली

आधी-समझी बातों से छुटकारा नहीं

तबतक

जबतक मिचकाती आँखों और उनमें

समाये सारे तमाशे को

अस्तित्व की खुली आँख

देख नहीं लेती एक ही पल में

अचानक

......................................................... अरुण

1 comment:

Sunil Kumar said...

दिल की गहराई से लिखी गयी एक सुंदर रचना , बधाई