Monday, November 1, 2010

विचार बहुत शरारती हैं

विचार बहुत शरारती हैं

आदमी में बोध या जागरण का

भ्रम जगाते हैं

अपनी नकली दुनिया में ही

आदमी को उलझाये हुए,

उसमें मुक्ति का आकर्षण पैदा करतें हैं

फिर विचारों के रसायन से बना

यह मन

मन ही मन मुक्ति ढूँढने लगता है

मुक्ति तो पाता नही

मुक्ति की लालसा में

उलझे हुए आदमी को

कई बाबाओं, ग्रंथों, क्रियाकलापों

और उपायों तंत्र मंत्र आदि की

दुनिया में भटकाता है

........................................... अरुण



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