Sunday, November 7, 2010

दृष्टिवानो को चुनना नही पडता

दृष्टि यदि साफ हो और

सामने फैला प्रकाश हो

तो रास्ता चुनना नही पडता

कदम सही रास्ते पर पड़ते हैं

अपने आप

कोई निर्णय लेना नही पडता

न ही गलती से बचने की

किसी जिम्मेदारी का बोझ ढोना पडता है

ये सारी बातें कि

क्या सही, क्या गलत,

कौन सा अपना कौन सा पराया

केवल दृष्टिविहीनों के लिए हैं

दृष्टिवानो के लिए नही

...................................... अरुण



1 comment:

डॉ० डंडा लखनवी said...

सराहनीय लेखन....हेतु बधाइयाँ...ऽ. ऽ. ऽ
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपको, सदा ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
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