Wednesday, November 3, 2010

सब मुश्किल बन जाता

अच्छा है जो

मेरी सांसे

मेरे प्राण, मेरी धड़कने

मुझसे पुछ कर नही चलती

वरना विचारों के तल पर

मै जिस तरह फडफडा रहा हूँ

शरीर के तल पर भी

फडफडाता रहता

उठना बैठना चलना फिरना

सब मुश्किल बन जाता

.......................... अरुण


2 comments:

संजय भास्कर said...

ह्रदय-स्पर्शी प्रस्तुतिकरण

संजय भास्कर said...

आपको दीपावली की ढेर सारी  शुभकामनाएं.