Sunday, August 15, 2010

भारत को वाद नही, निर्विवाद की जरूरत है

आजाद भारत को

जरूरत है सिर्फ -

राष्ट्र का हित चाहने वालों की

किसीपर भी अन्याय न हो यह सोचनेवालों की

पूरे भारत को भारत समझनेवालों की

सभी धर्म केवल ऊपरी चोलें हैं ऐसा

देखने समझनेवालों की

भेद हो सकतें है पर मनो में

भेदभाव न हों इस आशय से जीनेवालों की

अब आजाद भारत को मुक्ति चाहिए

सभी वादी यों से

राष्ट्रवादियों से, साम्यवादीयों से,

अलगाववादियों से, धर्मवादियों से

बहुजन अल्पजन वादियों से

सभी वादी आंशिक सोच के शिकार हैं

हठ और जिद से बीमार है

.......................................... अरुण



3 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति ...मन को छू गयी ..

स्वंत्रता दिवस की बधाइयां और शुभकामनाएं

संजय भास्कर said...

"माफ़ी"--बहुत दिनों से आपकी पोस्ट न पढ पाने के लिए ...

Udan Tashtari said...

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

सादर

समीर लाल