Friday, August 27, 2010

अनेकता में एकता

अनेकता में एकता

इस नारे को भारत में बड़ा सन्मान है

परन्तु ऐसी एकता तभी

संभव है जब

सभी एक दूसरे को

समझते हुए

एक साथ रहते हों

एक दूसरे को अड़चन समझकर

एक साथ रहना

एकता नही ला पाता

............................... अरुण

3 comments:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!

हमारीवाणी.कॉम said...

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प्राध्यापक प्रकाश said...

आधि बीज एकले।
सृष्टी की रचना मे दो प्रमुख बाते ध्यान देने योग्य है।
१ अनन्तता और
२ उपयुक्तता
अगर भारत अपने विविधता का सन्मान नही करता तो वह धीरे धीरे नष्ट हो जायेगा। भारत सेवकों (सभी राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं, समाजसेवकों, (विविध कारणो के लिये)आन्दोलनकर्ताओं) को चाहिये कि वे अन्यान्यों को अपना सहयोगी माने और सहिष्णुता से सहकार्य करे। क्योंकि यही भारत के आत्मा की आवाज है।