Monday, August 16, 2010

मन है ....

मन है मालकी

मन है तुलना

मन है कुछ पाने और बनने को

तडपना

हर क्षण या हर पल का नयापन

खो देना और ढल जाना

किसी चुने विचार में

किसी चयन या विकल्प में

सभी सामन्यताओं को भुलाकर

कुछ विशेष बनने की ललक में

.......................................... अरुण

1 comment:

ana said...

bahut sundar rachana ...........badhai